
Assam असम : असम विधानसभा चुनाव की मतगणना में शुरुआती रुझानों के अनुसार सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके नेतृत्व वाला नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के अनुसार, राज्य की 126 सीटों में से अधिकांश पर NDA आगे चल रहा है, जबकि विपक्षी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल पीछे दिखाई दे रहे हैं।
ताज़ा रुझानों के मुताबिक, BJP अकेले ही 66 सीटों के पार पहुंच चुकी है और कुल 72 सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा NDA के सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) भी क्रमशः आठ और नौ सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। इस तरह गठबंधन का प्रदर्शन राज्य में मजबूत स्थिति की ओर संकेत कर रहा है।
वहीं विपक्षी कांग्रेस 21 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस की सहयोगी असम जातीय परिषद (AJP) दो सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) भी दो सीटों पर आगे है। शुरुआती रुझानों से साफ है कि विपक्षी गठबंधन अभी काफी पीछे चल रहा है।
इस बीच कई प्रमुख राजनीतिक चेहरों के मुकाबले पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट विधानसभा सीट से पीछे चल रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जालुकबारी सीट से आगे बने हुए हैं, जिससे उनके पक्ष में मजबूत रुझान दिखाई दे रहा है।
AJP के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई खोवांग सीट से आगे चल रहे हैं, जबकि रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई सिबसागर सीट से बढ़त बनाए हुए हैं। अखिल गोगोई ने पिछली विधानसभा में इस सीट का प्रतिनिधित्व निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में किया था।
NDA के सहयोगी AGP के अध्यक्ष अतुल बोरा और कार्यकारी अध्यक्ष केशव महंत, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की कैबिनेट में मंत्री भी हैं, क्रमशः बोकाखाट और कालियाबोर सीटों पर आगे चल रहे हैं।
मतगणना की शुरुआत सुबह 8 बजे हुई थी, जिसमें पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की गई। इसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू हुई, जिससे विभिन्न सीटों पर रुझान सामने आने लगे।
गौरतलब है कि असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था। इस बार राज्य में रिकॉर्ड 85.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसमें लगभग 2.5 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
शुरुआती रुझानों से संकेत मिल रहे हैं कि असम में एक बार फिर NDA की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जबकि विपक्षी दलों के लिए मुकाबला चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी।





